एक हाथ से भूमि ली जाएगी, दूसरे हाथ से मिलेगा मुआवजा: समझौते के आधार पर भूमि प्राप्ति प्रक्रिया को मंजूरी
देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में आपसी सहमति के आधार पर भू-स्वामियों से भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गई है। यह व्यवस्था लघु, मध्यम और वृहद परियोजनाओं के लिए लागू होगी।
इस नई प्रक्रिया के तहत जहां कार्यदायी एजेंसियों को समय पर भूमि उपलब्ध हो सकेगी, वहीं भू-स्वामियों को भी जल्द और पारदर्शी तरीके से मुआवजा मिल सकेगा। इससे परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी।
अब तक कैसी थी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया
सड़क, बांध और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। इसमें भूमि चिन्हांकन, विज्ञापन, अधिसूचना और फिर मुआवजा वितरण जैसे कई चरण होते हैं। सामान्यतः इस पूरी प्रक्रिया में एक साल या उससे अधिक समय लग जाता है।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार अब कार्यदायी एजेंसी सीधे भू-स्वामियों से संपर्क कर सकेगी।
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित मुआवजा दरों के आधार पर मूल्य पर बातचीत होगी।
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दोनों पक्षों की सहमति होने पर भूमि की सीधी रजिस्ट्री की जाएगी।
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भूमि का मूल्य सीधे भू-स्वामी को भुगतान किया जाएगा।
यह व्यवस्था भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के अंतर्गत एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में लागू होगी।
कम समय, कम विवाद
अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया से भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय तीन से चार गुना तक कम हो सकता है। साथ ही मुकदमेबाजी में कमी आएगी और परियोजनाओं की कुल लागत भी घटेगी।
राजस्व सचिव एस.एन. पांडे ने कहा कि कई बार परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्त करने में अत्यधिक समय लग जाता है, लेकिन अब यह नया विकल्प उपलब्ध होने से प्रक्रिया आसान और तेज होगी।



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