अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, सुरक्षा को खतरा: राज्य सूचना आयोग
देहरादून में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयोग ने कहा है कि सरकारी अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने से उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर आयोग ने सिंचाई विभाग के लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना देने से इनकार करने के निर्णय को सही ठहराया।
मामला देहरादून निवासी विनय जायसवाल द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सिंचाई विभाग के एक अधिकारी की संपत्ति का विवरण मांगने से जुड़ा था। लोक सूचना अधिकारी ने सूचना देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि यह जानकारी अधिकारी के जीवन और सुरक्षा से संबंधित है तथा इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
अपीलकर्ता ने प्रथम और द्वितीय अपील में तर्क दिया कि 26 मार्च 2012 के शासनादेश के अनुसार सभी लोक अधिकारियों को अपनी संपत्ति का विवरण हर वर्ष अपने विभाग को देना और विभागीय वेबसाइट पर प्रकाशित कराना अनिवार्य है। इसलिए इस जानकारी को गोपनीय नहीं माना जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी ने अपनी संपत्ति का विवरण साझा करने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इससे उनकी निजता का उल्लंघन होगा और परिवार के सदस्यों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
लोक सूचना अधिकारी ने आयोग को बताया कि अधिकारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) का हिस्सा होती है, जिसे केवल विभाग के अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी ही देख सकते हैं। आयोग ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए माना कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने से सुरक्षा संबंधी जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
हालांकि, आयोग ने यह भी नोट किया कि शासनादेश के अनुसार अधिकारियों को अपनी संपत्ति का विवरण स्व-प्रकटन (Self Disclosure) के रूप में विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद, इस विशेष मामले में आयोग ने सूचना अधिकारी के पक्ष को सही माना और सूचना उपलब्ध कराने से इनकार करने के निर्णय को बरकरार रखा।



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