×

उत्तराखंड राज्यसभा चुनाव: भाजपा प्रत्याशी दिनेश आर्य ने दाखिल किया नामांकन, कुमाऊं को 12 साल बाद मिला प्रतिनिधित्व

उत्तराखंड राज्यसभा चुनाव: भाजपा प्रत्याशी दिनेश आर्य ने दाखिल किया नामांकन, कुमाऊं को 12 साल बाद मिला प्रतिनिधित्व

देहरादून। उत्तराखंड से राज्यसभा की एक सीट के लिए भाजपा ने अपने प्रत्याशी के रूप में वरिष्ठ पार्टी नेता दिनेश आर्य को मैदान में उतारा है। मंगलवार को दिनेश आर्य ने विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने विधानसभा के प्रभारी सचिव हेमचंद पंत को नामांकन पत्र सौंपा। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत पार्टी के कई मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहे।

दिनेश आर्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ विधानसभा पहुंचे। नामांकन के दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। पार्टी नेताओं के अनुसार, आर्य को राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने से भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न वर्गों में भी उत्साह का माहौल है।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

लंबे संगठनात्मक अनुभव का मिला लाभ

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को संगठन के लिए महत्वपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि आर्य भाजपा के वरिष्ठ और लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं और नैनीताल जिले में पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

भट्ट के मुताबिक, दिनेश आर्य लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे और उन्होंने पार्टी के लिए शानदार काम किया। उन्होंने कहा कि यह नेतृत्व का अच्छा निर्णय है और इससे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है।

प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आर्य का कुमाऊं क्षेत्र में भाजपा को मजबूत करने में बड़ा योगदान रहा है। उनके राज्यसभा में पहुंचने से भाजपा और उत्तराखंड की जनता को लाभ मिलेगा।

12 साल बाद कुमाऊं से भाजपा के नेता को राज्यसभा भेजने की तैयारी

दिनेश आर्य को राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने का फैसला केवल एक व्यक्ति को उच्च सदन भेजने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे भाजपा के क्षेत्रीय और संगठनात्मक समीकरण भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

करीब 12 साल बाद कुमाऊं क्षेत्र से भाजपा के किसी नेता को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। वर्तमान में उत्तराखंड कोटे की तीनों राज्यसभा सीटों पर गढ़वाल क्षेत्र से जुड़े नेताओं का प्रतिनिधित्व है। ऐसे में दिनेश आर्य की उम्मीदवारी के जरिए भाजपा ने क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है।

उत्तराखंड से राज्यसभा की मौजूदा सीटों में नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट और कल्पना सैनी शामिल हैं। इनमें नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। इसी सीट के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को अपना प्रत्याशी बनाया है।

कुमाऊं की राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने का संदेश

राजनीतिक जानकार दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को भाजपा के क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। लंबे समय से राज्यसभा में उत्तराखंड की तीनों सीटों पर गढ़वाल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व रहा है। ऐसे में कुमाऊं से आने वाले नेता को उच्च सदन में भेजने का निर्णय पार्टी के भीतर क्षेत्रीय संतुलन का संदेश देता है।

इतिहास पर नजर डालें तो पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी नवंबर 2008 में उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और मई 2014 तक उच्च सदन के सदस्य रहे। कांग्रेस की ओर से भी कुमाऊं क्षेत्र से महेंद्र सिंह माहरा और प्रदीप टम्टा राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।

हल्द्वानी के राजनीतिक समीकरण से भी जोड़ा जा रहा फैसला

दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को हल्द्वानी और कुमाऊं की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। कुछ समय पहले हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद रामलीला मैदान में हुए शुद्धीकरण हवन को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी हुई थी।

खरगे ने इस पूरे घटनाक्रम का मुद्दा राज्यसभा में भी उठाया था और इसे अपनी सामाजिक पहचान से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए थे। ऐसे में हल्द्वानी से आने वाले अनुसूचित जाति वर्ग के नेता दिनेश आर्य को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जाना एक अलग राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालांकि, भाजपा ने आधिकारिक रूप से दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को उस विवाद से नहीं जोड़ा है। इसलिए उनकी उम्मीदवारी को सीधे किसी एक राजनीतिक घटना की प्रतिक्रिया मानने के बजाय भाजपा के व्यापक क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के समीकरण के तौर पर देखना अधिक उचित माना जा रहा है।

संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं दिनेश आर्य

दिनेश आर्य की राजनीतिक पहचान केवल सामाजिक समीकरणों तक सीमित नहीं है। वह लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े हुए हैं और पार्टी में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

वह नैनीताल जिला भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चे में राष्ट्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारी संभाली है। वर्तमान में वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के पद पर दायित्व निभा रहे हैं।

उनका संगठन में लंबा अनुभव और कुमाऊं क्षेत्र में पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका उनकी उम्मीदवारी के प्रमुख आधारों में मानी जा रही है।

2017 और 2022 में विधानसभा टिकट के दावेदार रहे

दिनेश आर्य इससे पहले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के टिकट के दावेदार रहे हैं। 2017 और 2022 में उन्होंने नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के लिए दावेदारी की थी। इस बार भी विधानसभा चुनाव के संभावित दावेदारों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा था।

अब राज्यसभा के लिए उनका नाम तय होने के बाद विधानसभा टिकट को लेकर उनकी संभावित दावेदारी पर भी विराम लग गया है। साथ ही, विधानसभा चुनाव के दौरान उनके नाम से बनने वाले संभावित गुटीय समीकरणों की संभावना भी फिलहाल समाप्त हो गई है।

नामांकन के बाद भाजपा में उत्साह

दिनेश आर्य के नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित भाजपा के कई मंत्री, सांसद और विधायक विधानसभा में मौजूद रहे। पार्टी ने इस शक्ति प्रदर्शन के जरिए एकजुटता का संदेश भी दिया।

भाजपा के लिए राज्यसभा की यह सीट महत्वपूर्ण है और मौजूदा विधानसभा में पार्टी के संख्याबल को देखते हुए दिनेश आर्य के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना भी जताई जा रही है।

कुल मिलाकर दिनेश आर्य की राज्यसभा उम्मीदवारी में भाजपा ने संगठन में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ता को सम्मान देने, कुमाऊं को प्रतिनिधित्व देने और सामाजिक संतुलन साधने के तीनों संदेश एक साथ देने की कोशिश की है। अब उनका राज्यसभा तक पहुंचना उत्तराखंड की राजनीति में कुमाऊं क्षेत्र और विशेष रूप से हल्द्वानी की राजनीतिक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।

Previous post

उत्तराखंड कांग्रेस में सियासी हलचल: अपनों के साथ यात्रा पर निकले हरीश रावत, 7 अक्टूबर को दिल्ली में सैलजा-वेणुगोपाल से मुलाकात

Next post

उत्तराखंड कांग्रेस में बढ़ी हलचल: सैलजा के बाद वेणुगोपाल का हरीश रावत को संदेश, व्यक्तिगत अभियान स्वीकार नहीं

Post Comment