उत्तराखंड में भारी बारिश का असर: 132 सड़कें बंद, कई नदियां चेतावनी स्तर पर, आज भी येलो अलर्ट
देहरादून:
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित है। भूस्खलन और जलभराव के कारण प्रदेशभर में 132 सड़कें बंद हैं, जबकि कई प्रमुख नदियों का जलस्तर चेतावनी रेखा के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शुक्रवार को भी कई जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। वहीं हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर सहित मैदानी क्षेत्रों में भी गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
भूस्खलन और भूधंसाव के कारण चार राष्ट्रीय राजमार्ग, चार राज्य राजमार्ग, एक मुख्य जिला मार्ग सहित कुल 132 सड़कें बंद हैं। चमोली, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में सबसे अधिक असर देखा गया है। लोक निर्माण विभाग बंद मार्गों को खोलने में जुटा हुआ है।
लगातार बारिश से गंगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, नंदाकिनी, पिंडर, काली, गोरी और सरयू नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। हरिद्वार में गंगा चेतावनी निशान से ऊपर बह रही है, जबकि ऋषिकेश में जलस्तर चेतावनी रेखा से 25 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने के कारण त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन का आरती स्थल जलमग्न हो गया है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है।
उत्तरकाशी में लगातार भूस्खलन के कारण गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बार-बार बाधित हो रहे हैं। कई स्थानों पर यात्रियों और कांवड़ियों को रुकना पड़ा, जबकि जिले की कई संपर्क सड़कें अभी भी बंद हैं।
स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण करने, नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी रखने और डैम या बैराजों से पानी छोड़े जाने से पहले डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों तथा पड़ोसी राज्यों को समय रहते सूचना देने के निर्देश दिए। उन्होंने चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा, वैकल्पिक संचार व्यवस्था और आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय रखने पर भी जोर दिया।



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