×

रामगंगा-कोसी किनारे बसे गांवों का पहली बार वैज्ञानिक सर्वे, मानसून आपदाओं का होगा आकलन

रामगंगा-कोसी किनारे बसे गांवों का पहली बार वैज्ञानिक सर्वे, मानसून आपदाओं का होगा आकलन

अल्मोड़ा जिले में Ramganga River और Kosi River के किनारे बसे गांवों का पहली बार वैज्ञानिक सर्वे किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य मानसून के दौरान संभावित आपदाओं के जोखिम का आकलन कर प्रभावी रणनीति तैयार करना है।

यह सर्वे MANAS Vigyan Kendra द्वारा किया जा रहा है, जो Uttarakhand State Council for Science and Technology से संबद्ध है। सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपा जाएगा।

क्या-क्या हो रहा है सर्वे में शामिल

सर्वे के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—

  • नदी के जलस्तर और बहाव क्षेत्र का आकलन

  • किनारों पर कटान की संभावना

  • मकानों और बस्तियों की स्थिति

  • नदियों के संभावित आपातकालीन निकासी मार्ग

  • नदी के वर्तमान और संभावित बदले हुए मार्ग का अध्ययन

जीआईएस मैपिंग की सहायता से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में आपदा की स्थिति में नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

2010 की आपदा से सबक

वर्ष 2010 में भारी वर्षा के बाद कोसी नदी उफान पर आ गई थी, जिससे दर्जनों मकान, दुकानें और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि नदियां समय-समय पर अपना स्वरूप और मार्ग बदलती रहती हैं। ऐसे में भविष्य में संभावित बदलावों का पूर्व आकलन आवश्यक है।

व्यापक दायरे में हो रहा अध्ययन

रामगंगा नदी अल्मोड़ा जिले में लगभग 90 से 100 किलोमीटर तक बहती है, जबकि कोसी नदी का बहाव क्षेत्र करीब 103 किलोमीटर है। वर्तमान सर्वे में दोनों नदियों के साथ उनकी सहायक नदियों का भी अध्ययन किया जा रहा है।

डॉ. नवीन चंद्र जोशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी एवं केंद्र प्रभारी, मानस विज्ञान केंद्र अल्मोड़ा के अनुसार सर्वे कार्य प्रगति पर है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद आपदा प्रबंधन विभाग को सौंप दी जाएगी, जिससे मानसून काल में बेहतर तैयारी और रणनीति बनाई जा सके।

Post Comment