ट्रैकिंग रूट पर पहाड़ की छानियां बनेंगी इको-हट्स, स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
उत्तराखंड । उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पर्यटन और वन विभाग ने ट्रैकिंग रूट पर स्थित पारंपरिक छानियों को इको-हट्स में बदलने की योजना बनाई है। पहले चरण में दूधातोली-बिनसर और झुलका डांडा ट्रैक क्षेत्र की पारंपरिक छानियों को विकसित किया जाएगा।
इन इको-हट्स में पर्यटकों के लिए बायो-टॉयलेट, जल उपचार और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि पहाड़ों और जंगलों की स्वच्छता बनी रहे। योजना के तहत स्थानीय युवाओं के समूहों को इन इको-हट्स का संचालन सौंपा जाएगा और उन्हें विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पर्यटन विभाग के अनुसार इस पहल से ग्रामीण युवाओं को अपने गांवों में ही रोजगार मिलेगा, जिससे पलायन रोकने में मदद मिल सकती है। साथ ही पर्यटन से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में ही रहेगा। लोगों को होमस्टे अनुदान योजना के तहत सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
हिमालयी संस्कृति की पहचान हैं छानियां
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में छानियां या खरक हिमालयी जीवनशैली और संस्कृति का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। पत्थर, लकड़ी और घास से बने ये पारंपरिक अस्थायी आवास जंगलों और बुग्यालों के बीच बनाए जाते हैं, जहां ग्रामीण परिवार अप्रैल से अक्टूबर तक पशुओं के साथ रहते हैं। यह परंपरा न केवल आजीविका का माध्यम है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सफल मॉडल के बाद अन्य ट्रैकिंग रूट पर भी विस्तार
अधिकारियों के अनुसार यदि प्रस्तावित क्षेत्रों में यह मॉडल सफल रहता है, तो राज्य के अन्य ट्रैकिंग रूटों के आसपास स्थित छानियों को भी इको-हट्स और होमस्टे शैली में विकसित किया जाएगा। यह पहल राज्य की ईको-टूरिज्म नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, जिससे पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार—तीनों को बढ़ावा मिलेगा।



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