गोपालन और खेती से आत्मनिर्भर बन रही हैं चंपावत की महिलाएं
चंपावत: क्षेत्र का चांदनी स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभरा है। वर्ष 2019 में गठित इस समूह ने सीमित संसाधनों से शुरुआत कर आज खेती और पशुपालन के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
समूह की पांच महिलाएं वर्तमान में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। शुरुआत में उनके पास केवल एक गाय थी, जिससे आय बहुत कम होती थी। बाद में उन्होंने कम्युनिटी निवेश फंड (CIF) के तहत 50 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्नत नस्ल की गाय खरीदी और गोपालन का विस्तार किया।
आज समूह की महिलाएं वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन कर प्रतिदिन लगभग नौ लीटर दूध स्थानीय डेयरी को बेच रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने व्यावसायिक खेती में भी सफलता हासिल की है। इस सीजन में समूह ने लगभग तीन क्विंटल प्याज, छह क्विंटल आलू और तीन क्विंटल गेहूं का उत्पादन किया है।
महिलाएं पारंपरिक पहाड़ी कृषि को बढ़ावा देते हुए मोटे अनाज और विभिन्न दालों की खेती भी कर रही हैं। समूह की सदस्य कुसुम सेठी के अनुसार, खेती और पशुपालन के संयुक्त मॉडल से समूह की प्रत्येक महिला को हर महीने लगभग 14 से 15 हजार रुपये की आय हो रही है।
समूह का मानना है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और जिला प्रशासन के सहयोग से यदि अन्य स्वयं सहायता समूहों को भी पर्याप्त वित्तीय सहायता और अवसर मिलें, तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है और दिखाती है कि संगठित प्रयास, आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग से आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।



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