×

ऋषिकेश एम्स नियुक्ति फर्जीवाड़ा: नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के पांच आरोपियों की जमानत खारिज, दो फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद; अदालत ने सीसीटीवी और कंप्यूटर सिस्टम की जांच के दिए निर्देश

ऋषिकेश एम्स नियुक्ति फर्जीवाड़ा: नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के पांच आरोपियों की जमानत खारिज, दो फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद; अदालत ने सीसीटीवी और कंप्यूटर सिस्टम की जांच के दिए निर्देश

ऋषिकेश, देहरादून। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के किच्छा स्थित निर्माणाधीन सैटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी के मामले में पांच आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमनिंदर सिंह की अदालत ने पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। आरोपियों पर भर्ती के नाम पर लोगों से धनराशि लेने और फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने के आरोप हैं। मामले में दो फर्जी नियुक्ति पत्र मिलने की बात सामने आई है, जबकि एक आरोपी दीपक गुसाईं के कब्जे से दो लाख रुपये बरामद किए जाने का दावा भी किया गया है।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच आवश्यक बताई। साथ ही जांच अधिकारी को एम्स परिसर के सीसीटीवी फुटेज, संबंधित कंप्यूटर सिस्टम और दस्तावेजों को सुरक्षित कर उनकी जांच करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने एम्स के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज कर भर्ती प्रक्रिया तथा कथित एजेंसी की भूमिका की भी जांच करने को कहा है।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज

नौकरी दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी के इस मामले में जिन पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की गई हैं, उनमें दीपक गुसाईं, दीपांशु मंडल, दीपना मंडल, गणेश निसार और सुब्रत बछाड़ शामिल हैं।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

एम्स प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। इसके बाद आरोपियों ने अदालत में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे।

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमनिंदर सिंह की अदालत में बीते बृहस्पतिवार को जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। इसके बाद शुक्रवार को अदालत ने अपना आदेश जारी करते हुए पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

भर्ती के नाम पर धन लेने और फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने के आरोप

मामले में आरोप है कि एम्स के किच्छा स्थित सैटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर लोगों से धनराशि ली गई और नियुक्ति पत्र जारी किए गए। जांच के दौरान दो फर्जी नियुक्ति पत्र मिलने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी दीपक गुसाईं के कब्जे से दो लाख रुपये बरामद किए जाने का दावा भी किया गया था। हालांकि, मामले में सभी आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होनी है।

इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि एम्स प्रशासन ने निर्माणाधीन सैटेलाइट सेंटर में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए किसी एजेंसी को निविदा, अनुबंध या वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया था। इसके बावजूद भर्ती के नाम पर नियुक्ति पत्र जारी करने और धनराशि लेने के आरोप लगाए गए हैं।

अदालत ने भर्ती प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एम्स की ओर से निर्माणाधीन सैटेलाइट सेंटर में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए किसी एजेंसी को अधिकृत करने संबंधी निविदा, अनुबंध या वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया था।

इसके बावजूद नियुक्ति पत्र जारी किए जाने और नौकरी दिलाने के नाम पर धनराशि लेने के आरोपों को अदालत ने गंभीरता से लिया। अदालत के अनुसार, मामले में आरोपियों की भूमिका का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है।

अदालत ने यह भी माना कि जांच के इस चरण में आरोपियों को जमानत देने से उनके फरार होने या महत्वपूर्ण साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर सिस्टम की जांच के निर्देश

अदालत ने मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए विवेचक को महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। इसमें एम्स परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, संबंधित कंप्यूटर सिस्टम और भर्ती से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

इन साक्ष्यों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित नियुक्ति पत्र कहां और कैसे तैयार किए गए, भर्ती प्रक्रिया के नाम पर किन गतिविधियों को अंजाम दिया गया और इस पूरे प्रकरण में किन लोगों की भूमिका रही।

अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने पर जोर देते हुए जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि साक्ष्यों की उचित तरीके से जांच की जाए, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके।

एम्स अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी होंगे दर्ज

अदालत ने जांच अधिकारी को एम्स के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के भी निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया और कथित एजेंसी की भूमिका की जांच करने को कहा गया है।

जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि भर्ती के संबंध में किसी स्तर पर कोई अधिकृत प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं। साथ ही, कथित फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने में किन व्यक्तियों की भूमिका रही और धनराशि लेने के आरोपों से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जानी है।

एम्स प्रशासन की शिकायत के आधार पर शुरू हुई यह जांच अब दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरे मामले की तस्वीर

ऋषिकेश एम्स नियुक्ति फर्जीवाड़े के इस मामले में पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद जांच की दिशा महत्वपूर्ण हो गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले में आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच आवश्यक है और इसके लिए संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जरूरी है।

फिलहाल, अदालत के निर्देशों के अनुसार सीसीटीवी फुटेज, कंप्यूटर सिस्टम, दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के बयानों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे कथित भर्ती फर्जीवाड़े से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

Post Comment