स्यानाचट्टी में 10 घंटे बाद बहाल हुआ यातायात, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने ली राहत की सांस
उत्तरकाशी। यमुनोत्री धाम क्षेत्र में शनिवार रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद रविवार सुबह यमुनोत्री हाईवे कई स्थानों पर भूस्खलन, मलबा और बोल्डर आने से बंद हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की कड़ी मशक्कत के बाद ओजरी और पालीगाड के पास करीब सात घंटे तथा स्यानाचट्टी में लगभग 10 घंटे बाद यातायात बहाल कर दिया गया। मार्ग खुलने के बाद स्थानीय लोगों और यमुनोत्री धाम जा रहे श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली।
राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लगातार प्रयासों के बाद हाईवे से मलबा और बोल्डर हटाकर आवाजाही सामान्य की गई। विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज रावत ने कहा कि सभी प्रभावित स्थानों पर यातायात सुचारू कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में यमुनोत्री हाईवे पर बार-बार भूस्खलन होने से यात्रा प्रभावित होना आम बात बन गई है। उनका आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, जिसके कारण हल्की बारिश में भी कई स्थानों पर मलबा गिरने लगता है और यात्रियों व स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लगातार बारिश के चलते हाईवे के ऊपर गीठ पट्टी क्षेत्र के बाड़िया गांव के नीचे भू-धंसाव भी बढ़ने लगा है। इससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थायी सुरक्षा और उपचारात्मक कार्य नहीं किए गए तो भविष्य में गांव और आसपास के क्षेत्र को गंभीर खतरा हो सकता है।
इधर, प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी खराब मौसम का असर देखने को मिला। केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन के खतरे को देखते हुए घोड़ा-खच्चर संचालन बंद रखा गया, जबकि पैदल यात्री संकरे मार्ग से सावधानीपूर्वक आवाजाही करते रहे। वहीं चमोली जिले में चीन सीमा को जोड़ने वाला ज्योतिर्मठ–मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग भी पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने के कारण कई घंटों तक बाधित रहा। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बंद पड़े मार्गों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार राहत और बहाली कार्य में जुटी रहीं।


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