बदरीनाथ चढ़ावा मामला: गणेश गोदियाल का पलटवार, बोले- मंदिर निर्माण के लिए पैसा दिया, चढ़ावा चोरी नहीं की
देहरादून बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावा हेराफेरी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी (बदरी-केदार मंदिर समिति) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में मंदिरों के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए धन दिया गया था, लेकिन चढ़ावे में किसी प्रकार की हेराफेरी नहीं की गई।
गोदियाल ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक बहस की चुनौती स्वीकार करते हुए प्रेस क्लब पहुंचकर इंतजार किया, लेकिन हेमंत द्विवेदी वहां नहीं आए। उनके अनुसार, बहस में शामिल न होना इस बात का संकेत है कि आरोप लगाने वालों के पास अपने दावों के समर्थन में ठोस जवाब नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि चढ़ावा हेराफेरी के आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार के दौरान उसके नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया और 2014 में शासन की मंजूरी मिलने के बाद उसे नियमित किया गया।
गोदियाल ने यह भी बताया कि उनके कार्यकाल में बिनसर मंदिर और पोखरी के शिव मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बोर्ड की स्वीकृति के बाद धनराशि जारी की गई थी। उनका दावा है कि वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद बिनसर मंदिर का निर्माण कार्य रोक दिया गया, जिसे बाद में फिर से मंजूरी दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि टिहरी जिले के प्रतापनगर में मंदिर समिति की भूमि तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग निर्माण हेतु भी धन उपलब्ध कराया गया था।
गोदियाल ने सवाल उठाया कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही थे, तो पिछले नौ वर्षों में भाजपा सरकार या बीकेटीसी ने उनकी जांच क्यों नहीं कराई। उन्होंने यह भी कहा कि बीकेटीसी के नियमों के अनुसार अध्यक्ष से सीधे जुड़े किसी कर्मचारी को दान गणना की ड्यूटी पर तैनात नहीं किया जा सकता।
मामले की जांच फिलहाल पुलिस, बीकेटीसी और शासन स्तर पर गठित समितियों द्वारा जारी है।



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