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ऋषिकेश में विकास कार्य तय समयसीमा में पूरे करने के निर्देश, गुणवत्ता पर जोर

ऋषिकेश में विकास कार्य तय समयसीमा में पूरे करने के निर्देश, गुणवत्ता पर जोर

ऋषिकेश। नगर निगम कार्यालय में शनिवार को मेयर शंभू पासवान की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। मेयर ने अधिकारियों को निर्माण कार्य, सड़क सुदृढ़ीकरण, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता अभियान से जुड़े कार्य तय समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे करने के निर्देश दिए।

त्योहारी सीजन में सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता

बैठक में मेयर शंभू पासवान ने कहा कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिकता है। उन्होंने त्योहारी सीजन को देखते हुए शहर की सड़कों के रखरखाव और आंतरिक मार्गों की मरम्मत के कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी न हो और सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं। साथ ही, शहर में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्वच्छता अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी ध्यान देने को कहा।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

नियमित समीक्षा और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश

मेयर ने अधिकारियों को बैठक में लिए गए निर्णयों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की प्रगति पर नियमित नजर रखी जाए और संबंधित अधिकारी समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

बैठक में विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने और नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

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रवांई घाटी में बैलों की जगह मशीनों से हो रही लाल धान की मंडाई, समय और मेहनत की बचतपुरोला। उत्तराखंड की रवांई घाटी में पारंपरिक लाल धान की मंडाई का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है। पहले जहां बैलों की मदद से धान की मंडाई करने में कई दिन लग जाते थे, वहीं अब थ्रेशर मशीनों की सहायता से यह काम कुछ ही घंटों में पूरा हो रहा है। खेती में आए इस बदलाव से किसानों का समय और मेहनत बच रही है, लेकिन पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों को लेकर बुजुर्ग किसानों की चिंता भी सामने आ रही है। मशीनों से आसान हुई किसानों की राह रवांई घाटी में युवा किसान अब लाल धान की मंडाई के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। युवा किसान महिदेव असवाल, अर्जुन सिंह और उपेंद्र रावत का कहना है कि थ्रेशर मशीनों के आने से मजदूरों पर निर्भरता कम हुई है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि किसानों की शारीरिक मेहनत भी घट रही है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण खेतों तक बड़ी मशीनों को पहुंचाना आसान नहीं है। ऐसे में किसानों को पहाड़ के अनुकूल छोटी और सुविधाजनक मशीनों की जरूरत महसूस हो रही है। पारंपरिक तरीके को याद कर रहे बुजुर्ग किसान बुजुर्ग किसानों का मानना है कि पारंपरिक खेती के तरीकों का अपना महत्व रहा है। किसान युद्धबीर सिंह, हरी सिंह और सुदामा प्रसाद के अनुसार, पहले लाल धान की मंडाई से पहले फसल को कुनका लगाकर करीब एक महीने तक रखा जाता था। उनका कहना है कि इस पारंपरिक प्रक्रिया से धान के दाने मोटे और मजबूत होते थे तथा उनकी पौष्टिकता भी बेहतर रहती थी। आधुनिक मशीनों से काम भले ही जल्दी पूरा हो जाता है, लेकिन बुजुर्ग किसान खेती की पुरानी परंपराओं और उनसे जुड़े अनुभवों को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। आधुनिक तकनीक के साथ परंपरा को बचाने की जरूरत रवांई घाटी में खेती के तरीकों में तेजी से बदलाव हो रहा है। एक ओर आधुनिक मशीनें किसानों की मेहनत कम कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण की जरूरत भी महसूस की जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि किसानों को पहाड़ी खेतों के अनुकूल कृषि मशीनें उपलब्ध कराई जाएं और पारंपरिक खेती के उन तरीकों को भी सहेजा जाए, जो स्थानीय कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के बीच संतुलन बनाकर रवांई घाटी की खेती को अधिक सुविधाजनक और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

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