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देहरादून: किमाड़ी के घने जंगल में मिला कंकाल, तीन महीने से लापता मोहम्मद सारिक के कपड़ों से हुई पहचान, DNA रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज; हत्या के आरोपों की भी जांच कर रही पुलिस

देहरादून: किमाड़ी के घने जंगल में मिला कंकाल, तीन महीने से लापता मोहम्मद सारिक के कपड़ों से हुई पहचान, DNA रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज; हत्या के आरोपों की भी जांच कर रही पुलिस

देहरादून, 20 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में किमाड़ी से आगे जंगल में मिले कंकाल के मामले में पुलिस जांच तेज हो गई है। करीब तीन महीने से लापता 22 वर्षीय मोहम्मद सारिक के स्वजनों ने मौके से मिले कपड़ों के आधार पर कंकाल की पहचान की है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके लिए डीएनए जांच कराई जा रही है और नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि जंगल में मिला कंकाल मोहम्मद सारिक का है या नहीं। पुलिस युवक की मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के साथ ही स्वजनों की ओर से लगाए गए हत्या के आरोपों की भी जांच कर रही है।

किमाड़ी के जंगल में मिला कंकाल, सात किलोमीटर अंदर तक पहुंची पुलिस

देहरादून के किमाड़ी क्षेत्र से आगे जंगल में हाल ही में एक कंकाल मिलने से इलाके में चर्चा शुरू हो गई। जानकारी के अनुसार, कंकाल जंगल के भीतर करीब सात किलोमीटर की दूरी पर मिला। मौके से कुछ कपड़े भी बरामद हुए, जिन्हें देखकर स्वजनों ने कंकाल की पहचान मोहम्मद सारिक के रूप में की।

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हालांकि, कपड़ों के आधार पर की गई पहचान को अंतिम नहीं माना जा रहा है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक जांच करा रही है, ताकि मृतक की पहचान की पुष्टि की जा सके और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके।

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17 जुलाई की रात घर से लापता हुआ था मोहम्मद सारिक

मोहम्मद सारिक देहरादून की आजाद कॉलोनी का निवासी था। वह 22 वर्ष का था और ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था।

जानकारी के अनुसार, सारिक 17 जुलाई 2026 की रात अचानक घर से लापता हो गया था। उसके घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला।

इसके बाद 18 जुलाई को स्वजनों ने पटेलनगर कोतवाली में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और युवक की तलाश के लिए आवश्यक कार्रवाई की। लंबे समय तक उसका पता नहीं चलने पर मामले को अपहरण की प्राथमिकी में तरमीम कर दिया गया था।

कपड़ों के आधार पर स्वजनों ने की पहचान

किमाड़ी के जंगल में कंकाल मिलने के बाद मामले में नया मोड़ आया। घटनास्थल से बरामद कपड़ों को देखकर मोहम्मद सारिक के स्वजनों ने कंकाल को उसी का होने की आशंका जताई।

हालांकि, पुलिस का कहना है कि केवल कपड़ों के आधार पर मृतक की पहचान की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। इसलिए डीएनए जांच के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया अपनाई गई है।

जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद कंकाल लापता युवक मोहम्मद सारिक का है या नहीं। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की जांच को दिशा देगी।

डीएनए जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजे गए नमूने

सीओ सदर अंकित कंडारी ने बताया कि कंकाल की पहचान की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए डीएनए जांच आवश्यक है। इसके लिए नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं।

पुलिस जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट से कंकाल की पहचान स्पष्ट होने के साथ ही मामले की जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।

मौत की परिस्थितियों और हत्या के आरोपों की जांच

पुलिस इस मामले में केवल कंकाल की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता लगाने का भी प्रयास कर रही है। स्वजनों की ओर से हत्या की आशंका जताए जाने के बाद इन आरोपों को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

जांच के दौरान पुलिस को यह पता लगाना होगा कि युवक घर से लापता होने के बाद कहां गया था, वह किमाड़ी के जंगल तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। हालांकि, इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं।

फॉरेंसिक रिपोर्ट और जांच से मिलने वाले अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

तीन महीने से लापता युवक के मामले में रिपोर्ट का इंतजार

मोहम्मद सारिक के लापता होने के बाद से उसके स्वजन लगातार उसके बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद कर रहे थे। अब किमाड़ी के जंगल में कंकाल मिलने और कपड़ों के आधार पर पहचान किए जाने के बाद मामले में अहम मोड़ आया है।

फिलहाल डीएनए जांच की रिपोर्ट आना बाकी है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक पुष्टि के बाद ही कंकाल की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। इसके साथ ही मौत की वजह और हत्या के आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच भी जारी रहेगी।

फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि किमाड़ी के जंगल में मिला कंकाल मोहम्मद सारिक का है या नहीं और यदि इसकी पुष्टि होती है, तो उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। इन सवालों के जवाब पुलिस जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेंगे।

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