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अलग उत्तराखंड राज्य की मांग पर संसद में मुखर हुए थे बीसी खंडूड़ी

अलग उत्तराखंड राज्य की मांग पर संसद में मुखर हुए थे बीसी खंडूड़ी

भुवन चंद्र खंडूड़ी ने अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर संसद में जोरदार आवाज उठाई थी। सेना में मेजर जनरल पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वह 1991 में सक्रिय राजनीति में आए और पहली बार गढ़वाल संसदीय सीट से सांसद चुने गए। सांसद बनने के बाद उन्होंने पृथक उत्तराखंड राज्य के मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाया।

संसद में उन्होंने तत्कालीन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि राज्य गठन की मांग पर सरकार मौन है। उन्होंने सवाल किया था कि उत्तराखंड के लोग आखिर कब तक लाठी और गोलियां खाते रहेंगे। उस समय अलग राज्य आंदोलन पूरे पहाड़ और मैदान में तेज हो चुका था।

खंडूड़ी ने संसद में मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा कांड का जिक्र करते हुए कहा था कि आंदोलनकारियों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं तक के साथ दुर्व्यवहार किया गया और हर रोज गोलीबारी व हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अब यह अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उनकी इस भावुक और आक्रामक मांग का समर्थन उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी ने भी किया था। दोनों नेताओं ने संसद में सरकार को घेरते हुए उत्तराखंड राज्य गठन की मांग का समर्थन किया।

बीसी खंडूड़ी बाद में 1998, 1999, 2004 और 2014 में भी गढ़वाल सीट से सांसद चुने गए। केंद्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों के विकास, सड़क निर्माण और युवाओं को रोजगार देने को प्राथमिकता दी।

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